शिया वक्फ बोर्ड चीफ-वसीम रिज़वी ने कहा अयोध्या में सिर्फ राम मंदिर कोई मस्जिद नहीं

उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सत्ता में काबिज़ होने के बाद से राम मंदिर का मुद्दा बार-बार तूल पकड़ता रहा है . मामला अभी देश की सबसे बड़ी अदालत में हैं और जिस पर दिसम्बर से रोज़ सुनवाई होना है . 2019 का लोक सभा चुनाव भी अब ज्यादा दूर नहीं है, और बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती राम मंदिर का मुद्दा ही होने वाला है .

राम मंदिर मसले को सुलझाने के लिए आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर की ओर से मध्यस्थता की पहल की गई है. इसी कड़ी में आज उन्होंने उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी से मुलाकात की. दोनों की मुलाकात करीब आधे घंटे चली. गौरतलब है कि शिया वक्फ बोर्ड ने ही हाल में राम मूर्ति के लिए 10 चांदी के तीर देने का ऐलान किया था.श्री श्री रविशंकर से मुलाकात के बाद शिया वक्फ बोर्ड के प्रमुख वसीम रिजवी ने कहा कि जो लोग देश में शांति चाहते हैं वह इस कदम की तारीफ कर रहे हैं, जो देश में हिंसा चाहते हैं वह इसके खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि वहां पर अब कोई मस्जिद नहीं है, वहां सिर्फ मंदिर है. वहां पर कई मस्जिद हैं जहां पर नमाज पढ़ी जा सकती है.

उन्होंने कहा कि राम के नाम पर देश में लड़ाई नहीं होनी चाहिए. कुछ मौलवियों को छोड़कर सभी लोग कोई सॉल्यूशन चाहते हैं. हम लोग शिया वक्फ की तरफ से बोल रहे हैं, शिया वक्फ ही यह तय करता है कि मस्जिद कहां बनेगी. हमने अयोध्या में सभी पक्षों से बात की है.रिजवी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही इस मुद्दे का हल बातचीत से निकाल लेंगे. 2018 तक मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू हो सकता है. उम्मीद है कि श्री श्री जी के साथ आने से मुद्दे का हल निकलेगा. उन्होंने कहा कि अयोध्या, फैजाबाद में जितनी मस्जिदें हैं वह वहां के मुसलमानों के लिए काफी हैं.

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे बीजेपी के पूर्व सांसद राम विलास वेदांती ने श्री श्री की मध्यस्थता को स्वीकार करने से इनकार किया था. उन्होंने कहा था कि ‘श्री श्री रविशंकर की मध्यस्थता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी. राम जन्मभूमि आंदोलन राम जन्मभूमि न्यास और विश्व हिंदू परिषद ने लड़ा है इसलिए वार्ता का अवसर भी इन दोनों संगठनों को मिलना चाहिए.’इस मध्यस्ता से क्या फायेदा होने वाला है, ये तो जल्द पता चल ही जायेगा.फ़िलहाल मामला देश की सर्वोच्च अदालत में है. हालाँकि , कोर्ट ने भी आपस में मध्यस्ता करके मामला सुलझाने को कहा था ,लेकिन कोई समाधान नहीं निकला और सब दारो मदार कोर्ट पर ही है .

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