क्या पाकिस्तान और हिन्दुस्तान दुनियां में हमेशा अपनी नफ़रत से ही पहचाने जायेंगे ?

    एक कड़वा सच

    दुनियां में हर मुल्क की अपनी खूबियाँ होतीं हैं और हर मुल्क अपनी खूबियों से ही पहचाना और जाना जाता है लोग अगर तारीफ भी करतें हैं तो उस मुल्क की खूबियाँ गिनाने लगते हैं. मिसाल के तौर पर अपने ही देश को देख लीजिये एक हज़ार खूबियाँ है हमारे इस मुल्क में जिससे इसकी दुनियां में सबसे अलग पहचान हैं 250 के आस पास भाषायों का इस्तेमाल , हर धर्म जाती के लोंगो का मिल जुल कर मोहब्बत से रहना गंगा जमुनी तहज़ीब का मालिक ये मुल्क सारे जहाँ में अपना परचम बुलंद करे हुए है और एकता की एक अनोखी मिसाल कायम की है!

    हमारे मुल्क में हज़ारों लाखो लोग आप को ऐसे मिल जायेंगे जो अमेरिका , लंदन, फ़्रांस , इटली , सिंगापूर ,की तारीफ़ की माला हर वक़्त जपते मिलेगें और उनकी बातों में सभी हाँ में हाँ मिलायेंगे , और ख़ुद भी तारीफ़ करेंगे और किसी को कोई समस्या नहीं होगी ! लेकिन एक मुल्क ऐसा भी है जिसका नाम आपकी जुबां पर आया और आप या तो आतंकवादी बना दिए जाओगे या फ़िर देश के गद्दार. मुझे ये नहीं समझ आता की दुनियां के और भी तो देश हैं जिनकी लोग हर वक़्त तारीफ़ करतें हैं तब ऐसा क्यूँ नहीं होता आखिर सविंधान में कहाँ ऐसा लिखा है की किसी मुल्क की तारीफ़ करना जुर्म है , और मीडिया ने इस तरह की विचारधारा को क्यों बढ़ावा दिया है की पकिस्तान हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है

    चलो मानकी पकिस्तान ने हमेशा हमारे मुल्क को नुकसान पहुचाया और अपमान किया हैं लेकिन हम लोग भी इसका माकूल जवाब देतें रहें हैं हर चीज को आप जंग से जोड़ कर नहीं देख सकते . बचपन से सुनता आया हूँ की सबसे पहले अपने पडोसी का ख़याल रखो और उसकी तरफ मोहब्बत से देखो कोई ज़ुल्म और ज्यादती न करो ,मगर ये दोनों मुल्क के बीच ऐसी कौन सी नफरत है जिसको हम मिटा नहीं पा रहें हैं !

    क्या हमारा मीडिया लोंगो में इस तरह की विचारधारा को बढ़ावा दे रहा है जिससे दोनों मुल्को के लोंगो के बीच नफरत की दीवार बन रही है. या फ़िर हमारे समाज में कुछ लोग हैं, जो अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश में देश में इस तरह की सोच को आग की तरह फैला रहें हैं. मुल्क सब अच्छे होतें हैं सब मुल्कों की अपनी अपनी खूबियाँ होतीं हैं ,आप अगर उस मुल्क की किसी खूबी के कारण उसकी तारीफ़ कर दें तो इसमें क्या गलत है ,कौन सा जुर्म है लेकिन अगर वह मुल्क पकिस्तान है, तो तब ये बहुत बड़ा जुर्म है बात अगर इन्साफ की की जाये तो कोई उन लोगों को क्यूँ कुछ नहीं कहता जो अमेरिका , और लंदन , फ़्रांस की तारीफ़ की माला जपतें हैं उनको कोई देशद्रोही क्यों कोई नहीं कहता !

    चाइना से बड़ा दुश्मन कौन है भारत का ये भी एक सच है? जिसे नाही हमारा मीडिया दिखायेगा और नाही हमारे नेता जी कभी बताएँगे ! देश का प्रन्धन्मंत्री वहां जाकर शादी में शरीक हो जाये तो कुछ गलत नहीं होता, और कोई इंसान घुमने भी जाना चाहे तो वो आतंकवादी हो जाता है , हमें अपने समाज से इस तरह की विचारधारा को हटाना होगा और ऐसी सोच को बढ़ावा देने वालों को भी समझाना होगा , जिससे भविष में यही नफरत दुनिया में एक दोस्ती की मिसाल बन कर सामने आये जिसे आरा जहाँ याद रखे , क्या दुनियां में ये दोनों मुल्क हमेशा अपनी नफरत से ही जाने जायेंगे ,आप खुद सोच कर देंखे की क्या मैंने गलत कहा हैं , क्या ये दोनों मुल्क दुनिया में अपनी मोहब्बत के लिए नहीं जाने जा सकते हैं …………..

    जिसे सब आपका दुश्मन साबित करने में तुलें हों
    ज़रूरी नहीं है की हकीक़त में वो आपका दुश्मन हो!                                                NEHAL RIZVI

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