अमेरिका की मांग न मानने का खामियाज़ा भी तुर्की को भुगतना पड़ा, तुर्क करेंसी अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में 40 % लुढ़क गई।

    हाल ही में तुर्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग रिजेक्ट कर दिया जो उन्होंने अमेरिकी पादरी एंड्रयू ब्रुनसन को छुड़ाने के लिए रखी थी।

    एंड्रयू को 15 जुलाई 2016 को तुर्की में गिरफ्तार कर लिया गया था, उनके ऊपर 2016 में आर्मी द्वारा हुए असफल तख्तापलट के प्रयास की साजिश रचने का आरोप लगा और लगभग बीस महीने बाद उन्हें 35 वर्ष कारावास की सज़ा सुना दी गई।

    ट्रंप का कहना है कि उनके और तुर्की राष्ट्रपति रजब तईप एर्दोगोन के बीच अनौपचारिक समझौता हुआ था ब्रसेल्स के नाटो सम्मेलन कि वह अमेरिकी पादरी को छोड़ेंगे बदले में ट्रंप इज़रायल जेल में बंद तुर्क महिला कैदियों को छुड़वाने की कोशिश करेंगे।

    जबकि तुर्की सरकार ने किसी भी समझौते की बात से इंकार करते हुए कहा है कि उसके लिए देश का कानून और सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं है और वह कभी भी अमेरिका के आगे घुटने नहीं टेकेगा।

    पादरी के परिवार वालों का कहना है उनके साथ अन्याय हुआ है। गिरफ्तारी अवैध तरीके से की गई है। जबकि राष्ट्रपति एर्दोगोन का कहना है कि गिरफ्तारी वैध तरीके से हुई है और आरोप भी सही साबित हो चुके हैं।

    अमेरिका की मांग न मानने का खामियाजा भी तुर्की को भुगतना पड़ा, तुर्क करेंसी अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में 40 % लुढ़क गई। अर्थशास्त्र विशेषज्ञों का मानना है कि यह अमेरिका और तुर्की के बीच यह इकोनॉमिक वार की शुरुआत है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नाटो (नार्थ अटलांटिक ट्रीटी आर्गनाइज़ेशन) इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रया देता है।

    ये लेख सहीफ़ा खान ने लिखा है…

     

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