शोध में सामने आया श्रीमद्भागवत गीता से सभंव है मधुमेह का इलाज

तेलंगाना – 13 फरवरी 2019

इंसान के शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाने को मधुमेह यानी डायबिटीज कहा जाता है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के उस्मानिया जनरल अस्पताल (ओजीएच) के डॉक्टरों समेत शोधकर्ताओं की एक टीम ने डायबिटीज के इलाज का एक ‘आध्यात्मिक’ तरीका ढूंढ निकाला है। और इसका स्रोत है भगवतगीता ।

आंकड़ो के अनुसार शोधकर्ताओं का कहना है कि भगवतगीता में अर्जुन और भगवान कृष्ण के बीच हुए संवाद को बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है, खास तौर पर डायबिटीज जैसी पुरानी बीमारियों के इलाज में। शोधकर्ताओं का इशारा भगवतगीता के श्लोकों की ओर है जो जीवन में विभिन्न परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताते हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा, “गीता नकारात्मक स्थितियों की पहचान करती है और उनसे लड़ने के लिए सकारात्मक तरीका बताती है, भगवान कृष्ण ने बताया और अर्जुन ने उसका पालन किया।”

आंकड़ो के अनुसार शोधकर्ताओं ने बताया कि डायबिटीज एक लाइफस्टाइल बीमारी है यानी वह आपके जीवनशैली से जुड़ी हुई है। इसलिए इसके इलाज के लिए यह जरूरी हो जाता है कि जीवन शैली में पूरी तरह से बदलाव किया जाए, जिसमें खानपान और कसरत जैसी बुनियादी गतिविधियों में भी बदलाव होना चाहिए। यह अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ताओं ने कहा, “भगवतगीता एक धार्मिक या दार्शनिक किताब से कहीं ज्यादा है। इसके 700 से अधिक श्लोक जीवन के हर पहलू को समझने की गहरी समझ देते हैं और यह पूरी दुनिया के प्रासंगिक है।” इसके साथ उन्होंने कहा कि डायबिटीज की बीमारी का पता लगने पर पीड़ित व्यक्ति को अक्सर दुख की भावनाएं घेर लेती हैं। क्योंकि उसे अपनी जिंदगी में सबसे प्यारी चीजों में से कुछ को छोड़ना पड़ता है।

 

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