जैकी श्राफ बोले – दोस्तों के चरित्र में लगे दाग जनता के लिये मजे बनते जा रहे हैं

नई दिल्ली – 25 अक्टूबर 2018

नानाजी पर लगे आरोपों के बाद भारत में मीटू एक अभियान का रूप ले चुका है. इसके तहत आलोकनाथ, सुभाष घई, विकास बहल, अनु मालिक, कैलाश खेर जैसे कई दिग्गज सितारों के नाम सामने आए हैं.

इन दिनों बॉलीवुड में MeToo कैंपेन ने जोर पकड़ रखा है. कई नामी सेलेब्स पर इसकी गाज भी गिरी है. साजिद खान, नाना पाटेकर आलोक नाथ, विकास बहल और सुभाष घई जैसे बड़े और लोकप्रिय नाम मीटू में आरोपों का सामना कर रहे हैं. अब इस बारे में जैकी श्रॉफ ने अपनी राय रखी है. जैकी ने कहा, “इसमें उनके सहयोगियों का नाम आना अफसोसजनक है.”जैकी ने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेरे साथी कलाकार आज आपस में लड़ रहे हैं. वे अपने दामन में लगे दागों पर लोगों के बीच सफाई दे रहे हैं और बाकी लोग इसमें मज़ा ले रहे हैं.”

“लोगों को दूसरों की ज़िदगियों में झांकने में इतनी रुचि क्यों है? यह कितना बुरा है कि आजकल यही हो रहा है.”उन्होंने कहा, “मैं मानता हूं कि किसी भी महिला को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए, और जिन पर आरोप लग रहे हैं उनका मजा भी नहीं लेना चाहिए.

जैकी ने कहा, “दूसरे लोग क्या रहे हैं, इस बारे में लोगों को इतनी दिलचस्पी क्यों हैं?”

कहा, “यह बेहद महत्वपूर्ण है कि महिलाओं के लिए वर्कप्लेस पर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. अगर ऐसा कुछ भी होता है तो दोषी के खिलाफ तुरंत और कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. किसी को भी अश्लील व्यवहार बर्दाश्त नहीं करना चाहिए.”

सूत्रों के अनुसार शायद कुछ लड़कियां ऐसी होती हैं जो शर्मीली होती हैं और आवाज नहीं उठा पाती हैं. मैं जानता हूं मेरी भी पत्नी और बेटी है, लेकिन अब थोड़ा मजबूत होने का समय है.”

जैकलीन ने किया मीटू का सपोर्ट

पिछले महीने बॉलीवुड एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने एक इंटरव्यू में नाना समेत कुछ ऐसे लोगों पर वर्कप्लेस में उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था. तनुश्री के बाद कई महिलाएं सामने आईं हैं जिन्होंने नामचीन लोगों पर यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. बड़े सितारों ने मीटू कैम्पेन का समर्थन किया है. इसमें जैकलीन फर्नांडिस भी शामिल हो गई हैं.

जैकलीन ने कहा, “यौन उत्पीड़न केवल फिल्म जगत से जुड़ा एक मुद्दा नहीं है, ये पूरे समाज में व्याप्त है. दुर्भाग्यपूर्ण, यौन हिंसा की फिराक में घूम रहे लोग हर जगह मौजूद हैं. कभी-कभी तो हमारे अपने घर में होते हैं. उन्होंने कहा कि हमें वास्तविक मुद्दे से भटकना नहीं चाहिए. पूरा मुद्दा सेक्स के बारे में नहीं है बल्कि यह शक्ति संघर्ष के बारे में है. इसलिए हमें इस मुद्दे के बारे में सोचना चाहिए और उसका हल निकालना चाहिए.’

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