8,911 डॉक्टरों ने दिया इस्तीफ़ा, पूरे प्रदेश में सेवाएँ बंद करने की भी दी धमकी

प्रतिकात्मक फ़ोटो

राजस्थान में 8911 डोक्टरों ने अपने पद से दिया इस्तीफ़ा. शनिवार को डाक्टरों की सरकार से चली लम्बी बातचीत बेनतीजा रही जिसके बाद सभी 8911 डाक्टरों ने इस्तीफ़ा दे दिया. सभी डाक्टर पिछले 3 महीने से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे .

दैनिक भास्कर में छपी खबर के मुताबिक सेवारत चिकित्सा संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय चौधरी का कहना है कि आंदोलन कर रहे डॉक्टरों ने अपना इस्तीफा संघ के पास पहले ही भेज दिया था और बातचीत विफल होने के बाद सामूहिक रूप से इस्तीफा सरकार के पास भेज दिया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर का प्रमुख मांगों में वेतन बढ़ाने और स्वास्थ्य विभाग में अतिरिक्त निदेशक के पद पर नियुक्त किए गए राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) अधिकारी को हटाने की बात थी. डॉक्टरों का कहना कि चिकित्सा विभाग में अतिरिक्त निदेशक पद पर अब तक वरिष्ठ डॉक्टर की नियुक्ति होती थी, लेकिन अब इस पद पर आरएएस अधिकारी की नियुक्ति हुई है.

आंदोलनकारी डॉक्टरों ने राज्य के स्वस्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ से बातचीत के दौरान कहा कि अतिरिक्त निदेशक पद से आरएएस अधिकारी को तुरंत हटाया जाए और वे इस तानाशाही को स्वीकार नहीं करेंगे. अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार मंत्री सराफ ने डॉक्टरों को आश्वासन दिया है कि एक बार उप-चुनाव हो जाएं उसके बाद मांगों पर फैसला होगा और उनकी एक भी मांग को नजरअंदाज नहीं करेंगे.

मंत्री बोल ही रहे थे कि उप-सचिव पारस जैन बीच में बोल पड़े कि इनका फैसला उप-चुनाव के बाद नहीं बल्कि 2019 में अगली सरकार में होगा. जैन की बात सुन डॉक्टर भड़क गए और बातचीत को बीच में ही छोड़ कर चले गए.डॉक्टरों ने जैन पर भड़कते हुए कहा कि मंत्री और सचिव शांत बैठे हैं और उप-सचिव बीच में बोल रहे हैं. डॉक्टरों ने पूछा कि एक मंत्री और सचिव से बड़ा आरएएस अधिकारी कैसे हो गया?

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि सोमवार से पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा जाएगी और इसकी जिम्मेदार मौजूदा सरकार होगी.

 

 

चिंता का विषय ये बना हुआ है,कि इतनी ज्यादा तादात मे डाक्टरों का स्वास्थ सेवायों को ठप कर देना .मरीजों के लिए एक बड़ी समस्या हो सकती है.सरकार जल्द ही मामले का हल निकलना होगा, इसके पहले कोई बड़ी घटना ना हो जाये.

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