आज़ादी के 70 साल बाद भी देश में महिलाओं को क्यों नहीं मिल सकी आज़ादी

महिला समानता एंव सश्क्तीकरण के लाखों दावों के बावजूद हमारे देश में महिलाओं की स्थिति सुधर नहीं सकी है। यह बात वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम की रिपोर्ट में सामने आयी है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत लैंगिंक समानता के मामले में 144 देश में से 108 वें स्थान पर है। जबकि बंग्लादेश हमसे काफी बेहतर 47वें स्थान पर है। इस सूची में आइसलैंड, नार्वे और फिनलैंड जैसे देश इस साल भी शीर्ष पर रहे।

भारत की खराब रैंकिंग के लिए मुख्यतः  दो कारक जिम्मेदार हैं। पहला, “स्वास्थ्य और आयु” जिसमें भारत 141वें स्थान पर है। इस मामले में चीन की हालत सबसे खराब है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में लड़कों को तरजीह देने की प्रवृत्ति की वजह से लैंगिक असमानता को बढ़ावा मिलता है। दूसरा, “आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी” के मामले में भारत दुनिया में 139वें स्थान पर रहा। पिछले साल भारत इस मामले में 136वें स्थान पर था। इस मामले में भारत की स्थिति केवल ईरान, यमन, सऊदी अरब, पाकिस्तान और सीरिया जैसे देशों से ही बेहतर रही।

इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति के अलावा “शैक्षणिक उपलब्धि” और “राजनीतिक सशक्तिकरण” को भी सूचक बनाया गया था। वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम ने पहली बार साल 2016 में ये रिपोर्ट जारी की थी। उस समय इसमें कुल 115 देश ही शामिल थे। इस रिपोर्ट में समानता के लिए अधिकतम एक अंक दिए जाते हैं और असमानता के लिए न्यूनतम शून्य अंक दिए जाते हैं। इस साल भी लैंगिक समानता के मामले में दुनिया में सबसे बेहतर स्थित आइसलैंड की है उसे सूची में 0.878 स्कोर मिला है। वहीं यमन इस मामले में सबसे पिछड़ा देश है उसका स्कोर 0.516 रहा। इस साल भारत का स्कोर 0.669 रहा। पिछले साल भारत का स्कोर 0.683 था। साल 2006 में भारत का स्कोर 0.601 था।

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में महिलाओं की औसत सालाना आय पुरुषों के मुकाबले काफी कम है। महिलाएं एक समान काम के लिए पुरुषों के वेतन का करीब 60 प्रतिशत ही पाती हैं। कुल कामगारों में एक-तिहाई महिलाएं हैं लेकिन इनमें 65 प्रतिशत महिलाएं दिहाड़ी मजदूरी (कामवाली, बेबी सीटर, कुक इत्यादि) करती हैं, जबकि पुरुषों के कामगार वर्ग का केवल 11 प्रतिशत ही दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करता है। सभी क्षेत्रों को मिलाकर देश में केवल 13 प्रतिशत महिलाएं ही वरिष्ठ पदों, मैनेजर और विधायी पदों पर काम कर रही हैं।

 

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