बेसहारा कैदियों के लिए सहारा बनीं एपीसीआर

एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स APCR द्वारा लखनऊ जेल में बंद कई ऐसे सदस्यों को रिहा करवाया गया जिनकी पैरवी करने वाला, कानूनी लड़ाई लड़ने वाला कोई नहीं था। इनकी क़ानूनी कार्यवाही एवं अनथक प्रयास और जुर्माना अदा कर के रिहाई कराई गई। जिनके नाम इस प्रकार हैँ अबरार पुत्र मुर्तुज़ा हुसैन लखनऊ, हज़ारी पुत्र हिम्मत उन्नाव,रविशंकर पुत्र सियाराम लखनऊ।

एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स APCR एक ऐसी संस्था है जो समाज के दबे-कुचले, निर्धन और वंचित वर्गों को कानूनी सलाह, समाजसेवियों के लिये प्रशिक्षण, उत्पीड़ित जनों के क़ानूनी अधिकारों कि सुरक्षा और अन्याय को भारतीय परिदृश्य से मिटाने के लिये निरंतर प्रयास करती रहती है।

APCR के कोआर्डिनेटर नजमुस्साकिब खान ने जेल प्रशासन के भरपूर सहयोग की सराहना की और कहा जेल प्रशासन के सहयोग के बिना यह कार्य असंभव था। इस मौके पर वरिस्ठ अधीक्षक लखनऊ जेल श्री पी.एन. पांडेय, जेलर श्री त्रिपाठी जी, डिप्टी जेलर श्री हरिबंश पांडेय एवं  APCR के कोआर्डिनेटर नजमुस्साकिब खान व शानिलाही मौजूद थे।

 

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