क्यों माना जाता है यूएन को इतना प्रभावशाली

यूनाइटेड नेशंस यानि दुनिया का एकमात्र ऐसा संगठन जिसने विश्व शांति स्थापित करने में मदद की, लोगों के अधिकार के लिए आवाज़ उठाई। तमाम मुश्किलों, उपल्बधियों के पड़ाव को पार करते हुए आज अपनी स्थापना के 72वें साल में पहुंच गया है। 24 अक्टूबर 1945 में इसकी स्थापना हुयी। उस समया 45 देश इसके सदस्य थे जो अब बढ़कर 193 हो गए हैं।

दुनिया के तीन देश यूएन में शामिल नहीं है, कोसोवो, ताइवान और वेटिकन सिटी। कोसोवो को यूएन सदस्यों की ओर से तवज्जो नहीं मिली है। ताइवान 1971 से चीन के कब्जे में है और वेटिकन सिटी ने अपने धार्मिक कारणों का हवाला देकर इसका सदस्य बनने से इनकार किया है। सबसे हाल में (2011) साउथ सूडान इस संगठन का सदस्य बना है।

आशचर्यजनक बात यह है कि यूएन की छह अधिकारिक भाषा में हिंदी नहीं है। केवल अंग्रेजी, चीनी, स्पेनिश, अरेबिक, फ्रेंच और रूसी है।  कोसोवो, ताइवान और वेटिकन सिटी यूएन में शामिल नहीं हैं। कोसोवो को यूएन सदस्यों की ओर से तवज्जो नहीं मिली है। ताइवान 1971 से चीन से कब्जे़ में है और वेटिकन सिटी ने अपने धार्मिक कारणों का हवाला देकर इसका सदस्य बनने से इनकार कर दिया। 2011 साउथ सूडान इस संगठन का सदस्य बना।

यूएन विश्व के 9 करोड़ लोगों को खाना उपलब्ध कराता है। 6 करोड़ से अधिक विस्थापित लोगों की मदद करता है। क्लाइमेट चेंज की दिशा में काम करता है, शांति मिशन चलाता है, गरीबी से लड़ता है। मानव अधिकारों की रक्षा करता है और राष्ट्रों के बीच के संघर्षों को हल करने की कोशिश करते हुए एक शांतिपूर्ण विश्व बनाने की दिशा में काम करता है।

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