तानाशाही अधिक प्रिय, भारतवासियों को नहीं भा रही आज़ादी

विश्व के सबसे मज़बूत लोकतांत्रिक देश में से एक भारत के लोग ही लोकतंत्र को पसंद नहीं करते बल्कि उन्हें तानाशाही अधिक प्रिय है। जबकि भारत ने गुलामी से आज़ादी पाने के लिए क्या क्या दिन नहीं देखे कितने जतन किए उसके बाद जाकर आज़ादी मिली और लोकतंत्र कायम हुआ। अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के एक सर्वे में शामिल 55 प्रतिशत भारतीयों ने किसी न किसी तौर पर तानाशाही का समर्थन किया।

सर्वे में शामिल 27 प्रतिशत लोगों ने “मजबूत नेता” की जरूरत बतायी। सोमवार (17 अक्टूबर) को जारी  सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार इसमें शामिल 85 प्रतिशत लोगों ने कहा  कि उन्हें देश की मौजूदा सरकार पर भरोसा है। प्यू रिसर्च सेंटर ने दुनिया के चुनिंदा देशों में प्रशासन और लोगों के उस पर भरोसे के बारे में जानना चाहा। सर्वे में शामिल 48 प्रतिशत रूसियों ने “मजबूत नेता” की जरूरत की बात कही। प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार वैश्विक स्तर पर करीब 26 प्रतिशत लोग मानते हैं कि “मजबूत नेता” “संसद या अदालत के दखल” के बिना फैसले ले सकता है और ये शासन चलाने का “उचित तरीका” होगा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वे में शामिल करीब 71 प्रतिशत लोगों ने “ऐसा नेता को प्रशासन के लिए बुरा बताया।”

प्यू रिसर्च के सर्वे के अनुसार भारत में सेना के शासन के समर्थक भी काफी संख्या में हैं। सर्वे में शामिल 53 प्रतिशत भारतीयों ने सैन्य शासन को देश के लिए अच्छा बताया। वहीं दक्षिण अफ्रीका के 52 प्रतिशत लोगों ने सैन्य शासन को बढ़िया बताया। हालांकि इन दोनों ही देशों में 50 या उससे अधिक उम्र वालों में सैन्य शासन को सही नहीं मानने वाले ज्यादा थे, ये लोग लोकतंत्र या लोकतांत्रिक पुरुधाओं के उत्तराधिकारियों के शासन को बेहतर मानते हैं।

भारत एशिया प्रशांत क्षेत्र के उन तीन देशों में रहा जहां जवाब सर्वे में शामिल लोगों ने टेक्नोक्रेसी (तकनीकी मामलों के जानकार लोगों द्वारा प्रशासन चलाए जाने) का समर्थन किया। सर्वे में शामिल भारत के 65 प्रतिशत, वियतनाम के 67 प्रतिशत और फिलीपींस के 62 प्रतिशत लोगों ने टेक्नोक्रेसी का समर्थन किया। वहीं ऑस्ट्रेलिया के 57 प्रतिशत लोगों ने इसे प्रशासन का “खराब तरीका” बताया।

 

 

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