गुजरात चुनाव में ये 3 चेहरे बीजेपी के लिए सबसे बड़ी मुसीबत

गुजरात चुनाव में अब ज़्यादा समय नहीं बचा है. चुनाव आयोग ने अभी तारीखों का एलान भले ही अभी न किया हो, लेकिन राजनीतिक पार्टियों ने राज्य में चुनाव का माहोल अभी से बना दिया है और पार्टियों ने अभी से ताक़त झोंकनी शुरू कर दी है.गुजरात को बीजेपी का सबसे बड़ा  गढ़ माना जाता रहा है .लेकिन पिछले कुछ सालों से जिस तरह से तीन योवाओं ने ओबीसी और दलित समुदायों को प्रभावित किया है. उससे इस चुनाव में बीजेपी की मुश्किलें साफ़ बढ़ती दिख रहीं हैं.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार गुजरात चुनाव में जातीय समीकरण को पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के संयोजक हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के संयोजक अल्पेश ठाकुर प्रभावित करेंगे. गुजरात की आबादी में ओबीसी का हिस्सा 51 फीसदी है. ऐसे में माना जा रहा है कि कुल 182 विधानसभा सीटों में से 110 सीटों पर हार-जीत प्रभावित हो सकती है.

पाटीदार आंदोलन के हार्दिक पटेल पहले ही साफ कर चुके हैं कि जब तक आरक्षण की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह कोई भी राजनीतिक पार्टी ज्वॉइन नहीं करेंगे. पाटीदार समिति ने कई मौकों पर कांग्रेस के प्रति नरम रुख दिखाया है. हार्दिक पटेल और उनके समर्थक ये भी संकेत दे चुके हैं कि विधानसभा चुनाव में वे बीजेपी के खिलाफ वोटिंग करेंगे.वहीं, बीजेपी सरकार पाटीदारों का वोट पाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है. यहां तक कि पाटीदार नेताओं के खिलाफ केस भी वापस लिए जा रहे हैं.

दूसरी ओर, राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के संयोजक जिग्नेश मेवाणी बीजेपी को आरएसएस की पॉलिटिकल विंग बताते हैं. उनके मुताबिक, बीजेपी के अलावा कोई भी राजनीतिक पार्टी हिंदू राष्ट्र की बात नहीं करती. उनका कहना है कि संविधान की प्रस्तावना में साफ-साफ लिखा है कि भारत एक लोकतांत्रिक, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र है. संविधान की आत्मा (प्रस्तावना) के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी. मेवाणी ने बताया, “चुनाव में दलित और मुस्लिम एक धुरी की तरह काम करते हैं. अगर ऐसा ही पैटर्न रहा तो इस बार गुजरात विधानसभा चुनाव में दलित और मुस्लिम समुदाय 25 से ज्यादा सीटें प्रभावित कर सकते हैं.”

अपने एक समान लक्ष्य के लिए हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकुर क्या साथ आ सकते हैं? इसपर जिग्नेश का कहना है कि दलितों के हितों के लिए अगर ऐसा करना पड़ा, तो वो पीछे नहीं हटेंगे. वहीं, ओबीसी, एससी और एसटी एकता मंच के संयोजक अल्पेश ठाकुर ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई कमेंट नहीं किया है. उन्होंने कहा कि वो जल्द ही इस बारे में कोई फैसला लेंगे.

गुजरात चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर

गुजरात और हिमाचल में मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है. गुजरात को बीजेपी का गढ़ माना जाता है. राहुल गांधी एक महीने में दो बार यहां का दौरा कर चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी एक महीने में 3 बार गुजरात होकर आए हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि गुजरात में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होगी. यही नहीं, पीएम मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी हिमाचल प्रदेश का दौरा भी कर चुके हैं. दोनों पार्टियों ने यहां कई मुद्दों पर एक-दूसरे को घेरा था.

 

LEAVE A REPLY