ट्रेन में तीन माह की बच्ची ने तोड़ा माँ की गोद में दम

दर्दनाक हादसा ट्रेन में यात्रा के दौरान तीन माह की बेटी की मौत. इस दर्दनाक घटना के बाद एक दंपत्ति के साथ ज़ालिम सिस्टम की वजह से जो कुछ भी हुआ, उससा उसका दर्द औइर बढ़ गया. पंचनामा और पोस्टमार्टम की कानूनी प्रक्रिया के नाम पर दंपती को घंटों सेंट्रल स्टेशन पर परेशान होना पड़ा. दंपती  हाथों में बेटी का शव लिए सेंट्रल स्टेशन पर रोते रहे.

बिहार के आरा जनपद निवासी चंद्रशेखर बुधवार को अपनी पत्नी पूनम और तीन महीने की बच्ची के साथ जियारत एक्सप्रेस से आरा से जयपुर के लिए रवाना हुआ था. जयपुर में पूनम का परिवार रहता है. रास्ते में बच्ची की तबियत अचानक खराब हो गई। पूनम को पता ही नहीं चला कि बच्ची ने कब उसकी गोद में दम तोड़ दिया. कानपुर से कुछ पहले किसी अन्य यात्री ने रेलवे कंट्रोल रूम को फोन करके एक बच्ची की मृत्यु के बारे में सूचना दे दी.

सुबह पौने नौ बजे ट्रेन कानपुर सेंट्रल पर रुकी तो डॉक्टर के साथ टीम कोच में पहुंची.डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद जीआरपी ने पंचनामा और पोस्टमार्टम के नाम पर दोनों को नीचे उतार लिया. इसके बाद शुरू हुई दंपती की मुसीबतों की एक और कहानी. बच्ची का पिता बेटी का शव गोद में लिए पत्नी के साथ करीब चार घंटे तक सेंट्रल पर बैठा रोता-बिलखता रहा लेकिन जीआरपी की कागजी कार्रवाई पूरी नहीं हुई.

किसी तरह मामला जीआरपी प्रभारी राममोहन राय तक पहुंचा, तब जाकर पंचनामा भरा गया। बच्ची की मौत बीमारी से हुई है, इसलिए वह पोस्टमार्टम नहीं चाहता। चंद्रशेखर को केवल इतना ही लिखकर देना था और इस प्रक्रिया को पूरा करने में उसे पांच घंटे लग गए.

जीआरपी के तमाम सवालों से दंपति इतना उलझ गए थे की बदहवास होकर वे स्टेशन पर ही बैठ गए . बाद में करीब 8 बजे आगरा से उनके परिजन कानपुर पहुंचे और उन्हें साथ  ले गए .

 

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