पांच नुस्खे दूर करेंगे डिप्रेशन.

दिनभर की टेंशन तनाव परेशानियां कभी कभी इतना हावी हो जाती हैं कि इंसान में नकारात्मक विचार आने लगते हैं और यही नकारात्मक विचार धीरे धीरे अवसाद केे  रूप ले लेते हैं। जोकि घातक बीमारी साबित हो सकती है इंसान के लिए। ऐसी स्थिति में ज़रूरी होता है धैर्य बनाएं रखना और ज़्यादा से ज़्यादा दूसरे लोगों से बात करना।

मनोविज्ञान को समझें

मनोविज्ञान में नकारात्मक भावों से दूर रखने के लिए कॉग्नीटिव बिहेवियरल थेरेपी, साइकोथेरेपी आदि विधाओं में कई उपाय हैं। आप इनसे संबंधित किताबें पढ़ सकते हैं जिससे बहुत हद तक आपकी सोच में बदलाव आएगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा।

दौर बीत जाता है

हर समस्या का अपना एक दौर होता है जो जीवन में कभी न कभी आता है और बीत भी जाता है। ऐसे में किसी समस्या को अपने जीवन से इतना बड़ा न बनाएं कि वह दौर आपको अपने आप से बड़ा लगने लगे। बड़ी से बड़ी समस्या को आप सिर्फ एक दौर मानकर चलें तो मन में निराशा कभी बैठ ही नहीं सकती।

अपनी काबिलियत को न भूलें

हो सकता है समय सही न हो, हो सकता है आपकी किसी गलती का खामियाजा आपको दिन-रात परेशान करता हो, लेकिन इन सबके बीच आपके व्यक्तित्व के गुणों कभी दरकिनार न करें। बुरे से बुरे समय में भी अपने गुणों को याद रखें। कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता लेकिन हर किसी में अच्छाई-बुराई तो होती ही है। इसलिए अपनी कमियों को पहचानें पर अपने गुणों की अनदेखी न करें।

खुद निर्णय लेना सीखें

अवसाद की स्थिति में मजबूत से मजबूत व्यक्ति भी निर्णय नहीं ले पाता। ऐसे में छोटे-छोटे निर्णयों को लें और उनपर अमल करें। ये न सोचें कि आपके निर्णय का परिणाम क्या होगा, सिर्फ यह ध्यान में रखें कि एक बार अगर अपने किसी निर्णय पर अमल किया तो वह अनुभव ही होगा।

जहां बुराई है वहां अच्छाई भी है

सोच बदलने का फेर है। किसी बुरे दौर से गुजरने वाले हर व्यक्ति को पता होना चाहिए की जीवन में जहां बुराई है, वहीं अच्छाई भी है। हर दौर को अगर अपने जीवन का एक अनुभव मानकर चलें तो नकारात्मक भावों का मन पर प्रभाव कम पड़ता है।

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