गांधी के इन विचारों पर चल के आप बना सकते हैं खूबसूरत जीवन

हमारी ज़िंदगी में अकसर ऐसे पड़ाव आते हैं जब हमें लगने लगता है कि अब जीने का कोई फायदा नहीं, यह दुनिया सिर्फ तमाशा है इसका कोई महत्व नहीं। दरअसल हकीकत यह है कि इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी से हमने इतनी ढेर सारी उम्मीदें लगा रखी हैं कि जब हमारा एक भी सपना टूटता है तो ऐसा लगने लगता है कि यह जीवन बेकार है। ईश्वर की बनाई इस हसीन धरती पर हमारे लिए कोई जगह नहीं।

आज गांधी जंयती पर गांधी जी के इन विचारों को अपना लिया जाए तो जीवन जीना आसान हो जाएगाः-

  1. जो मनुष्य अपने मन के बुरे भावों के सिवा अन्य आपात्तयों से भय रखता है, वह अहिंसा का पालन नहीं कर सकता। मनुष्य के डरने की केवल एक ही वस्तु है वह  है अपना विकारी चित्त। ईश्वर का डर कहिए, अधर्म का डर कहिए या विकार रूपी शत्रु का डर कहिए, तीनों एक ही हैं। विकार न हो तो अधर्म नहीं हो सकता और अधर्म न हो तो ईश्वर का डर जैसे शब्द का प्रयोग अनुपयुक्त है।
  2. कपड़ों की गंदगी का कारण केवल दरिद्रता ही नहीं होती। बहुतेरी गंदगी तो अच्छी आदतें ना होने के से और आलस्य के कारण होती है। हमारी आंखों को ऐसा अभ्यास होना चाहिए कि ये गंदगी को देखकर खामोश न रह सकें। उस गंदगी को दूर करने की कोशिश करें। बात बात पर अपशब्द कहने की भी आदत एक तरह की अस्वच्छता ही है।
  3. हम सब जो पढ़े लिखे कहलाते हैं वे अपनी मेहनत से जितना पैदा कर सकते हैं, उससे बहुत अधिक पदार्थों का उपभोग करते हैे और बेकार का संग्रह कर लेते हैं। परिश्रम के बिना जो पदार्थ नहीं उपजते और जिनके बिना जीवन टिक नहीं सकता, उनके लिए शारीरिक श्रम किए बिना उनका उपभोग करें तो जगत के प्रति हम चोर ठहरते हैं।

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