देश के सबसे शांतिपूर्ण राज्य में सबसे ज़्यादा आत्महत्याएँ

यह वास्तव में बेहद चौकाने वाला है, कि गोवा में आत्माहत्या की दर पुरे देश के मुकाबला कही ज़्यादा है. माजूदा आकंड़ों के अनुसार देश भर में आत्महत्या की दर 11.7 है ,जबकि गोवा में 15.8 है.

यूँ तो गोवा भारत का बेहद शांतिपूर्ण राज्य माना जाता है. और टूरिज्म का भी अच्छा केंद्र है. जहाँ देश और दुनिया से लोग समय बिताने आते हैं. और सरकार ने भी पिछले कुछ समय से गोवा में  अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के क्षेत्र में विकास किया है. गोवा को आज भी पूरब का मोती कहा जाता है.

Radiance weekly- मैगज़ीन में छपी एक ख़बर में आत्महत्या को लेकर जो आंकड़े दियें है, वो सरकार के लिए एक चिंता का विषय बन सकतें है. अकेले गोवा में ही आत्महत्या की दर 15.8 है. और पुरे देश में 11.7 जो एक अब गंभीर मुद्दा है.  हालाँकि , आत्महत्या करने के कुछ प्रमुख कारण भी है जिसपे सरकार को ध्यान देना होगा.

विशेषकर महिलाएं जो आत्महत्या कर रहे लोगों की सूची में शीर्ष पर हैं. और महिलाओं के आत्महत्या करने के जो कारण हैं, वो पति और परिवार के सदस्यों, परिवार के मुद्दों, बीमारियों, असफल प्रेमों के कारण निराशा और हताशा से छेड़छाड़  उत्पीड़न आदि .

वेश्यावृत्ति हिंसा यौन दुर्व्यवहार अवांछित गर्भावस्था आदि के कारण स्वयं आक्रामकता से होने वाली अनियंत्रित आत्महत्याएं हैं. गोवा के प्रसन्न माहौल का उत्तरदायित्व इसके लिए जिम्मेदार है, जो एक तरफ से महिलाओं के लिए स्वतंत्रता प्रदान करता है, लेकिन उन्हें अपने प्रतिकूल सुरक्षा देने में विफल रहता है

इसके अलवा गोवा में नशे का एक ऐसा जाल है, जिसमें लोग फंसकर भी अपनी जान गवां रहें हैं. ड्रग्स, वाइन,जैसे नशे की लत लोगो की ज़िन्दगी को ख़त्म करने में लगी हुयी है . और ये गोवा के लिए एक ख़तरे का संकेत है

जीवन के प्रति दृष्टिकोण में परिवर्तन जिसका अर्थ है जीवन के सभी विलासिता के साथ समय की कमतम सीमा पर प्राप्त करने के उद्देश्य से ही कई लोगों को कमाने के आसान और तेज तरीकों के लिए बाहर जाने के लिए प्रेरित किया जाता है, जो बाद में उनकी आत्महत्या का कारण बन जाता है.

 

 

 

 

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