BHU : विवाद कमिश्नर ने सौंपी जांच रिपोर्ट, जानिए-कौन दोषी

रिपोर्ट में ये बात कही गयी है कि BHU प्रशासन ने पीडिता की शिकायत को ध्यान नहीं दिया और वक़्त होने ने बावजूद भी कोई समाधान नहीं निकाला.

वाराणसी के पुलिस कमिश्नर नितिन गोकर्ण ने काशी हिन्दू विश्विविद्यालय में हुए लाठीचार्ज पर मंगलवार का अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इस रिपोर्ट में उन्होंने विवि के प्रशासन को दोषी ठहराया है।

कमिश्नर गोकर्ण ने अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव राजीव कुमार को दी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएचयू प्रशासन ने पीड़िता की शिकायत को संवेदनशील तरीके से हैंडल नहीं किया और वक्त रहते इसका समाधान नहीं किया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर वक्त रहते इस मामले को सुलझा लिया गया होता तो इतना बड़ा विवाद खड़ा नहीं होता। रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे मामले में सबसे बड़ा दोष प्रशासन का ही है, वो चाहते तो यह मामला आराम से निपट सकता था।

वहीं खुफिया रिपोर्ट को माने तो बीएचयू परिसर में छात्राओं के साथ हुई छेड़खानी के विरोध में शुरू हुए उनके धरना-प्रदर्शन को कुछ ही घंटे बाद राजनीतिक दलों और नकारात्मक गुट के लोगों ने हाइजैक कर लिया था। इतना ही नहीं, इस मामले को पीएम के दौरे के दरम्यान ही बड़ा बनाने की भी पूरी तैयारी कर ली गई थी। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार जेएनयू प्रकरण के तौर पर बीएचयू को सुलगाने में जुटे लोगों को विश्वविद्यालय प्रशासन के अडिय़ल व लापरवाह रवैये से खूब मौका मिला और वे अपने मंसूबे में कामयाब हो गए। अंतत: छेड़खानी का मसला पीछे छूट गया और बीएचयू एक बवाली परिसर के रूप में राष्ट्रीय फलक पर बदनाम कर दिया गया।

बीएचयू मामले को खुफिया विभाग ने ‘फैब्रिकेटेड करार दिया है। पूरे मामले को बड़ा बनाने के लिए बीएचयू प्रशासन को भी दोषी माना गया है। खुफिया सूत्रों के अनुसार 21 सितंबर की शाम भारत कला भवन के पास जब छात्रा से छेड़खानी हुई तो सबसे पहले समीप मौजूद बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों ने बेतुके बोल बोलते हुए व्यथित किया। बाद में प्रॉक्टोरियल बोर्ड में छात्रा ने लिखित शिकायत की तो उसे लंका थाने को फारवर्ड करने के बजाय रातभर दबाए रखा गया।

छेड़खानी की घटना के बाद जब छात्राएं 22 सितंबर को BHU के गेट पर बैठकर धरना देने लगी तब मामले की शिकायत थाने पहुंचाई गई और पुलिस ने छेड़खानी का मुक़दमा दर्ज किया उधर, सुबह से ही बीएचयू के कुलपति को बुलाने की मांग छात्राएं कर रही थीं, लेकिन वह नहीं गए। शाम को पीएम को लंका होकर मानस मंदिर जाना था, लेकिन बीएचयू और जिला प्रशासन ने ‘इंटरनल और आउटर मामला बताते हुए गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकना शुरू कर दिया।

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