बीएचयू मामले में आलोचना में घिरी प्रदेश सरकार ने शुरू की कार्रवाई

काशी नगरी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज के मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार ने संज्ञान लेते हुए लंका के थाना प्रभारी, भेलूपुर के सर्किल अधिकारी और एक एडिशनल सिटी मजिस्‍ट्रेट (एसीएम) को हटा दिया है। एसएसपी ऑफ‍िस से इस बात की पुष्टि हुई है कि लंका थाने पर आगजनी और बलवा के आरोप में 1,000 छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। छात्राओं का आंदोलन रविवार को भी जारी रहा।

छात्राओं का समर्थन करने के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और वरिष्ठ नेता पी.एल. पुनिया बनारस पहुंचे तो पुलिस ने शहर में प्रवेश करते ही हिरासत में ले लिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, राज बब्बर और पुनिया बीएचयू जाना चाहते थे। कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए उन्हें वहां जाने से मना किया गया तो वे वहीं (गिलट बाजार में) धरने पर बैठक गए। जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में राज बब्बर, पुनिया के अलावा पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश मिश्रा, पूर्व विधायक अजय राय सहित सैकड़ों छात्र-छात्राएं और कार्यकर्ता शामिल रहे।

शनिवार के पुलिस लाठीचार्ज, गोलीबारी, पथराव और आगजनी के बाद रविवार सुबह भी बीएचयू के बाहर अशांति का माहौल रहा। सिंह द्वार पर छात्राओं का धरना जारी रहा। वहीं बीएचयू से सैकड़ों छात्र-छात्राएं अपने घरों की ओर रवाना होने लगे हैं। पूरा बीएचयू परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। परिसर में और परिसर के बाहर यहां 20 ट्रक पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं।

बीएचयू के त्रिवेणी हॉस्टल की छात्राएं बीते शुक्रवार से बीएचयू के गेट पर धरना दे रही हैं। उल्लेखनीय है कि विवि परिसर में छात्रों द्वारा छेड़ेखानी का आरोप लगाते हुए छात्राएं वीसी से मिलने की जिद पर अड़ी थीं। वीसी कार्यालय ने 4-5 छात्राओं को मिलने की बात कही, लेकिन छात्राएं चाहती थीं कि वीसी से बातचीत सभी के सामने हो। इस बीच शनिवार शाम वीसी धरना स्थल पर जाने के बजाय त्रिवेणी हॉस्टल में दूसरे गुट की छात्राओं से मिलने पहुंच गए, जो इस आंदोलन से अलग हो चुकी थीं। जिसकी जानकारी होते ही धरने पर बैठी छात्राएं वीसी के दफ्तर पहुंचकर नारेबाजी करने लगी। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने पहले तो उन्हें रोका। बाद में शनिवार रात एक बजे तक पुलिस और छात्राओं के बीच झड़प चलती रही।

बीएचयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय को दो अक्टूबर तक बंद कर दिया है। छात्राओं को हॉस्टल खाली करने का फरमान जारी कर दिया गया है। बीती रात हुए घटनाक्रम को लेकर रविवार सुबह छात्राओं ने शांति मार्च निकाला। मार्च एलडी गेस्टहाउस पर पहुंचा, जहां पुलिस ने लाठी पटक कर उन्हें पीछे रहने का संकेत दिया, जिससे माहौल फिर अशांत हो गया और उत्तेजित छात्राओं ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। बीएचयू के पक्ष में भी कुछ कर्मचारियों ने शांति मार्च निकाला तो पुलिस ने उन्हें सुरक्षा प्रदान की। लेकिन जब छात्रों ने शांति मार्च निकालने की अनुमति मांगी तो पुलिस ने अनुमति नहीं दी है।

खबर फैलते ही छात्राओं के समर्थन में दूसरे हॉस्टल के छात्र भी आंदोलन में कूद गए और कुछ ही देर में आंदोलन हिंसक हो उठा। वहां तैनात 1500 से ज्यादा पुलिस के जवानों ने छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज किया और कुछ चक्र गोलियां भी चलाई। विरोध में छात्रों ने पथराव किया और पुलिस के वाहनों में आग लगा दी। सूचना मिलते ही प्रभारी आईजी प्रेम प्रकाश और बनारस के मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण समेत कई अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ बीएचयू परिसर पहुंचे। घटना के बाद मौके पर पहुंचे चीफ प्रॉक्टर ओ.एन. सिंह ने कहा कि छात्राओं को समझाने की कोशिश हो रही है, सभी दोषी लड़कों पर कार्रवाई की जाएगी। गोकर्ण ने कहा कि पूरी रिपोर्ट राज्य व केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने परिसर में घटी इस घटना को दुखद बताया और इसे असामाजिक तत्वों की साजिश करार दिया। कुलपति ने कहा, “हमें पता चला है कि बड़ी मात्रा में बाहर से आए लोग इस आंदोलन को हवा देने की कोशिश कर रहे थे। हमें सूचना मिली है कि कुछ असामाजिक तत्व विश्वविद्यालय के माहौल को बिगाड़ने का षड्यंत्र रच रहे हैं।” त्रिपाठी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारे एक विद्यार्थी के साथ दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी, जिसके बाद हमने सुरक्षा सख्त करने का निर्णय लिया और इसके लिए प्रयास भी हो रहे हैं। परिसर में छात्राओं की सुरक्षा के लिए जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। परिसर को सुरक्षित बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले में कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है। मुख्यमंत्री के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर किए गए ट्वीट के अनुसार, योगी ने वाराणसी के मंडलायुक्त से बीएचयू के पूरे घटनाक्रम पर और पत्रकारों के साथ हुई घटना को रपट मांगी है।

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