हिंदू-मुस्लिम नफरत का यह दौर क्‍या सोशल मीडिया की मेहरबानी है ?

  1. कौमी एकता और भाईचारे की घिसी पिटी बातों को एक तरफ रखते हैं और आज ये मान लेते हैं कि भारत में हिन्दू मुसलमानों से और मुसलमान हिन्दुओं से नफरत करते हैं… इस बात ज्यादा आश्चर्य में पड़ने की जरूरत नहीं है. सोशल मीडिया का रुख करिए, रोज दंगा होता है. सुबह होते ही एक धड़ा दूसरे पर हमला बोल देता है. ऐसे में दूसरा भी खामोश नहीं रहता, पलटवार करता है. इसमें से हिंदू कौन है और मुसलमान कौन, ये ज्‍यादा दिमाग लगाने वाली चीज नहीं है. आज के हालात पर ये कहना गलत नहीं है कि सोशल मीडिया के आने के बाद नफरत के उन परिंदों को पंख मिल गए जिनके जीवन का एक ही उद्देश्य है- दूसरे समुदाय को अपशब्द कहना. एक वक़्त था जब लोग दिलों में कुंठा लिए थे, मगर इस बात से डरते थे कि अगर अपने दिल में बसी उस नफरत को वो लोगों के सामने लाएं तो समाज क्या कहेगा. लेकिन सोशल मीडिया ने अब ऐसा लोगों को बेपरवाह बना दिया है. सियासी कहा-सुनी देखते हुए देखते धार्मिक उलाहने पर पहुंचने लगी है.
मौजूदा वक़्त में जो हिन्दुओं का मुसलमानों के प्रति और मुसलमानों का हिन्दुओं के प्रति रवैया है कहना गलत नहीं है कि अब दोनों ही समुदायों की एक दूसरे के प्रति नफरत चरम पर है. और इस नफरत को फैलाने में सोशल मीडिया की भूमिका सबसे अहम है.

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